Friday, January 27, 2012

आज मुझे "मा" गाओ ....... गीता पंडित

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मेरे मन के प्रांगण में भी
भाव सुमन भर लाओ,
मैं नित-नित गाती हूँ तुमको
आज मुझे माँ ! गाओ 
 
शंख नाद के पावन भावों 
सी भर आये मेरी लेखनी,
सत्यं शिवं सुंदरं बनकर
जनमन कथा सुनाये लेखनी,

वीणा पाणी मात शारदे !
ऐसा वर ले आओ |
मैं नित-नित गाती हूँ तुमको
आज मुझे  माँ ! गाओ |

लिखी सूर की तुमने पाती
बनीं कबीर की भाषा सादी,
बाँची तुलसी की रामायण
कालीदास को आयीं गाती ,

रुद्ध कण्ठ है अधर हैं कंपित
सुर सरिता लहराओ  |
मैं नित-नित गाती हूँ तुमको
आज मुझे माँ ! गाओ |

तुमको गाती आयी युगों से
कब गाने मैं पायी.
तुम ही मात्रा अक्षर बिंदु 
कब वर्ण समझ मैं पायी,  

बरसें नयना हर पल मेरे 
गीतों में ढल आओ ।
मैं नित-नित गाती हूँ तुमको
आज मुझे माँ ! गाओ ||


गीता पंडित 

(मन तुम हरी दूब रहना ) मेरे काव्य संग्रह से 

3 comments:

sushila said...

"वीणा पाणी मात शारदे !ऐसा वर ले आओ |
मैं नित-नित गाती हूँ तुमकोआज मुझे माँ ! गाओ |"

बहुत सुंदर गीता जी।

S.N SHUKLA said...

बहुत सुन्दर और सार्थक सृजन, बधाई.

S.N SHUKLA said...

बहुत सुन्दर और सार्थक सृजन, बधाई.