Friday, November 11, 2011

यादों की गठरी में देखो कौन बंधा आया ,,,, गीता पंडित

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यादों की
गठरी में देखो
कौन बंधा आया,
उत्सव के
गलियारे में फिर
मनवा भरमाया |


चूड़ी पायल, टिकली लेकर
धनिया हर्षायी,
नया घाघरा चोली लेकर
मुनिया घर आयी,
देख रही दर्पण में मुखडा
नयना भीग गये,
पी परदेसी कैसे पायल
बिछुआ रीत गये,


अंखियों के
कोटर में फिर से
साजन संग लाया
कौन बंधा आया |


कल ही की थी
बात बना
विस्फोटक पल दहला,
बाजारों में
फिर से रौनक
जन मानस बहला,
पर जेबों पर
भारी पड़ती
बाजारों की बातें.
मन की इच्छाओं
को कैसे
रहीं दबातीं घातें,


फीकी -फीकी
मुस्कानों पर
भारी पड़ आया
कौन बंधा आया ||



गीता पंडित
11/11/11

16 comments:

s.chandrasekhar.india said...

गीता दीदी आज तो हम ही बंधे आ गए हैं, आपका ब्लॉग आज पहली बार देखा, बहुत सुन्दर है..
शुभकामनायों के साथ ..

गीता पंडित said...

फेसबुक कमेंट्स..

Dhanpat Swami ati sundar....bs ..kya kahun......aanand aaya..

गीता पंडित said...

Ashutosh Mishra

बहुत बढ़िया....

गीता पंडित said...

Kavi Anil Carpenter

गीता मेम
गजब का लिखा है ।
बधाई ।

गीता पंडित said...

Rituparna Mudra Rakshasa

‎Geeta ji...bahut sundar geet!!!

गीता पंडित said...

Dinesh Joshi

बहुत खूब गीता जी...बधाई !

गीता पंडित said...

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'

ऊषा की किरणों संग देखो .. भाव बंधा आया .. गीत तुम्हारे सुनने मैं भी विहगों संग आया .. .. अद्भुत गीता जी .. बधाई सवेरे सवेरे मन प्रसन्न हो गया।

गीता पंडित said...

Prem Lata Just beautiful.......badhyee Gita Ji.

गीता पंडित said...

Dhananjay Singh

सुन्दर रचना.......

गीता पंडित said...

Rajendra Sharma

शिल्प और संवेदना, दोंनो सुंदर...। बधाई और शुभकामनाएं॥

गीता पंडित said...

वंदना शर्मा

पर जेबों पर भारी पड़ती बाजारों की बातें....बहुत कुछ है इन पंक्तियों में बधाई गीता जी ..

गीता पंडित said...

Misir Arun बाजारों की बातें.
मन की इच्छाओं
को कैसे
रहीं दबातीं घातें,

फीकी -फीकी
मुस्कानों पर
भारी पड़ आया
कौन बंधा आया |.................बहुत सुन्दर ! जीवन की डोर से बंधे चले आते हैं ......................................इन बाजारों में !

गीता पंडित said...

Hema Dixit

उत्सव के ..गलियारे में फिर .. मनवा भरमाया ......... मन की इच्छाओं.. को कैसे .. रही दबाती घाते.. उत्सव तो जैसे बस बहाने भर है हकीकतो के बीच जी बहलाने को ,बहुत सही शब्दों में उकेरा है ...

गीता पंडित said...

Anju Sharma

यादों की
गठरी में देखो
कौन बंधा आया,
उत्सव के
गलियारे में फिर
मनवा भरमाया | ..........बहुत सुंदर लिखा दी, मन प्रसन्न हो गया........

गीता पंडित said...

धर्मेन्द्र कुमार सिंह

अच्छा नवगीत है गीता जी, बधाई

sushila said...

धनिया की टिकली और रीते बिछुए बहुत कुछ कह जाते हैं - मिलन का उल्लास और विरह की वेदना ! अत्यंत सुंदर भावाभिव्यकित !