Monday, September 14, 2009

हिन्दी है बिंदी माथे की....

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हिन्दी है बिंदी माथे की
सजती हरेक वेष में,
प्रेम का संदेश सिखाती
हर जाति हर देश में,


देश काल से इसे ना बांधो
सारे जग पर राज करे,
ममता की गाकर लोरी
हर मन में विश्राम करे ॥




हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई...




गीता पंडित (शमा)

4 comments:

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...
मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी "में पिरो दिया है।
आप का स्वागत है...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत-बहुत बधाई!

Apanatva said...

bahut sunder sandesh detee hai ye kavita .
thanks for visiting my blog and leaving comment .

ह्रदय पुष्प said...

देश काल से इसे ना बांधो
सारे जग पर राज करे,
ममता की गाकर लोरी
हर मन में विश्राम करे ॥
बहुत सुंदर - नव वर्ष के मंगल कामना के साथ