Tuesday, July 29, 2008

याद ......

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शायद याद किया है उसने, एक बड़े अरसे के बाद.,
देखो हिचकी मुझको आये , एक बड़े अरसे के बाद.|

घर-आँगन सूना-सूना, सब कुछ बिखरा-बिखरा सा,
मुड़ कर देखा है फ़िर उसने, एक बड़े अरसे के बाद |

एकाकी मरुथल सी साँसे, प्यासी रेतीली धरती...,
तुम तो सावन लेकर आये, एक बडे अरसे के बाद |

मीरा सी दीवानी हूँ मैं, सुध-बुध जग की भूल गयी,
तुम दीवाने बन कर आये, एक बड़े अरसे के बाद.|

घुप्प अँधेरी रात घनी है, सन्नाटों की चहल-पहल..
तुम तो शायद पूनम लाये, एक बड़े अरसे के बाद.|

दरवाजे खिडकी बंद सभी, हवा-धूप सब है खामोश.,
"शमा" को जीवन देने आये,एक बड़े अरसे के बाद |

गीता पंडित (शमा)

3 comments:

रश्मि प्रभा said...

हर याद में आकर्षण,और प्यारी हिचकी
बहुत खूब
कोई आया तो !

वेद प्रकाश सिंह said...

excellent mam.....agar jindagi me 'yaade' na rahe to fir jindagi berang ho jaayegi.jo baate ek arse pahle aapke saath hui thi,un sab yaado ko aap yaad kar rahi hai aur in yaado me koi shamil bhi hai,jo in yaado ko lekar aa raha hai.....kahi wo mai to nahi...bahut khoob mam.

praveen pandit said...

kamaal hai.

ek bahut khoobsoorat
hindi ghazal se ru-b-rukaraya aapne

ek behad apnapan se ladi-fadi ghazal.

bahut khoob......