Wednesday, July 25, 2012

हक़दार हैं भई पुरस्कार के (एक व्यंग्य) .... गीता पंडित

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मनाया जायेगा जश्न
टकराएंगे जाम से जाम
माँ उतारेगी आरती अपने सपूतों की
बहन लेगी बलाएँ
और करेगी प्रार्थना भाईयों की लंबी उम्र के लियें
उन के द्वारा किये गये कारनामों के लियें
रोशन करके आये हैं जो पिता का नाम,
गली मौहल्ले, समाज देश का नाम


कारनामा भी इतना बड़ा
जिसे सुनकर सिहर उठेगी हवा
सहम जायेगी बहती सरिता
दहल जाएगा धरती का दिल-ओ दिमाग


रेप किया चौहत्तर वर्ष की महिला का
बलात्कार किया ढाई साल की मासूम बच्ची का
मारा पीटा, नोचा खसोटा
निर्वस्त्र किया सडक पर जाती अकेली लड़की को


लंबी है कारनामों की फेहरिस्त
इनाम तो मिलना ही चाहिए
दे दीजिये आप जो चाहें 
हक़दार हैं भई पुरस्कार के 



गीता पंडित 
25/7/12

2 comments:

बिखरे हुए अक्षरों का संगठन said...

दर्द ही दर्द अभिव्यक्ति की आँखों से मनो आंसू छलक रहे हों

mark rai said...

is dard me kahin na kahin samvedanhinta ka taana buna gaya hai... ye manav ki durbalta ka pratik hai....